जीवों में जनन
(Reproduction in Organisms)
जीवन काल (Life span) :- जीव का जन्म से लेकर प्राकृतिक मृत्यू तक की अवधी या काल को उस जीव का जीवन काल कहते हैं।
जीवन अवधि की अवस्थाएँ
जीवन अवधि की तीन अवस्थाएँ होती हैं :-
- किशोरावस्था (Adolescence)
- परिपक्वता (Maturity)
- कालप्रभावन/जीर्णता (dilapidation)
2. परिपक्वता:-इस अवस्था में ही जीव जनन करता है। यह किशोरावस्था की अंतिम अवस्था होती है।
3. जीर्णता :- जीवों के शरीर में समय के प्रभाव के कारण कुछ क्रमिक क्षय होता है जिसे कालप्रभावन/ जीर्णता कहते हैं।
मृत्यु :- जीव के शरीर की जैविक क्रियाओं का बंद हो जाना, मृत्यू कहलाता है।
मृत्यू के प्रकार
मृत्यू दो प्रकार का होता है:-
1. चिकित्शीय मृत्यू (Clinical Death)
2. जैविक मृत्यू (Biological Death)
1. चिकित्शीय मृत्यू :- जीव की हृदय गति तथा नाड़ी गति रुक जाना, पुतलियों का स्थिर या फैल जाना, चिकित्शीय मृत्यू कहलाता है।
2. जैविक मृत्यू :- चिकित्शीय मृत्यू के कई घंटो बाद जब शरीर की समस्त कोशिकाएं व अंग कार्य करना बंद कर देती हैं तो उसे जैविक मृत्यू कहते हैं।
कुछ जीवों का जीवन काल निम्न है:-
- Elephant - 65-70 years
- Rose - 5-7 years
- Dog - 20-25 years
- Banana Tree - 25 years
- Cow - 20-25 years
- Horse - 50-60 years
- Banyan Tree - 200 years
जनन
(REPRODUCTION)
जीवों में अपने समान संतान उत्पन्न करने की क्षमता, जनन कहलाती है।
अथवा
यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें जीव अपने समान संतान उत्पन्न करता है।
जनन के प्रकार
Types of Reproduction
जीवों में मुख्य रूप से जनन की दो विधियाँ पायी जाती हैं। -
- अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
1. अलैंगिक जनन
(Asexual Reproduction)
इस प्रकार के जनन में केवल एक ही जीव या जनक भाग लेता है। इस विधि में व्यस्क बनने के बाद जीव अपनी हूबहू प्रतिलिपियों के रूप में संततियाँ उत्पन्न करता है। अतः जनक तथा संततियों के बीच आनुवंशिक पदार्थ एवं लक्षणों में कोई अंतर नहीं होता है। अतः इस विधि द्वारा उत्पन्न संततियों को क्लोन (Clone) कहते हैं। यह जनन तीव्र दर से होता है।
0 Comments